साक्षात्कार : दलित विमर्श

सोशियो लीगल लिटरेरी के इंटरव्यू सीरीज के दूसरी कड़ी में आज हमारे साथ हैं दलित दस्तक के संपादक, अशोक दास जी। अशोक दास जी इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन जेएनयू…

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समाज मे साहित्य की आवश्यकता

कहा जाता है कि साहित्य समाज का दर्पण होता है। अर्थात् समाज साहित्य को विषय प्रदान करता है जिन पर साहित्यकार अपनी कलम चलाता है और साहित्य समाज की समीक्षा…

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यदि…

यदि मैंने जन्नत देखी होतीतो दावे के साथ कह पाता कितुम्हारे साथ बिताए हुए दिनों के आगेजन्नत बहुत मामूली चीज है। अब चूँकि मैंने नर्क देखा हैतब दावे के साथ…

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राजनैतिक शिष्टाचार और विचारधारा की अर्थी

समाज को अगर जानना समझना है तो सबसे ज़रूरी है उस समाज के साहित्य से थोड़ा परिचित होना। साहित्य समाज का दर्पण होता है। मगर उस दर्पण को आजीवन शीशमहल…

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साक्षात्कार : एम. के. पांडेय

सोशियो लीगल लिटरेरी के इस इंटरव्यू सीरीज की पहली कड़ी में मंच के संस्थापक संपादक राजेश रंजन ने बात किया , भोजपुरी साहित्य के जानकार , लेखक, लल्लनटॉप कॉलमनिस्ट प्रोफेसर मुन्ना कुमार पाण्डेय से।

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Guest Post by Dhananjay Kushwaha

[ 1 ] मुझे इंतज़ार है उस दिन काजब मैं किसी गाँव या शहर मे पढ़ूँकोई पित्रसत्ता पर कविताजिसमे लड़कियों केशोषण का ब्यौरा हो ।और कविता सुन रही सारी लड़कियांएक…

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Overnight Success

By- Atika Chaturvedi Photo Credit : Chriscokkis.com “Before you become an overnight success, you must be an everyday hustler.” Struggling with clinical depression, a young single mother was trying hard…

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