गीत चतुर्वेदी से गायत्री की बातचीत

अंवा-गार्द एक फ्रेंच शब्द है, जो आमतौर पर पुराने ज़माने में सेना की टुकड़ी का नेतृत्व करने वाले सिपाही या सेनापति के लिए इस्तेमाल किया जाता था। बाद में कला की दुनिया में उन लोगों को परिभाषित करने में प्रयुक्त होता था, जो नवीन प्रयोग करते थे, कलात्मक प्रयोगधर्मिता की अग्र पंक्ति में खड़े होते थे, रूढ़िवादी नहीं थे। जहाँ तक मेरी बात है, कई बार मालूम भी नहीं चलता या देर से पता चलता है कि आपके बारे में ऐसा कोई शब्द या विशेषण- जैसा कुछ प्रयोग किया जा रहा है। ऐसे शब्द या उपाधि या विशेषण पढ़ने-सुनने में कई बार अच्छे लगते हैं, बाज़ दफ़ा अच्छा भी महसूस होता है, लेकिन समग्रता में मैं इन सब से प्रभावित नहीं हो पाता। मैं अपने काम को अधिक देखता हूँ, नाम और उपाधियों को कम।

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शहर, संस्कृति एवम् साहित्य

[लखनऊ को 14 नवंबर 2019 से पहले अजीज़ दोस्त आदित्य, और अभिषेक की नज़र से समझा, लखनऊ की बात करने के दौरान एक अलग क़िस्म की चमक होती थी इनकी…

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साक्षात्कार : नवीन चौधरी

सोशियो लीगल लिटरेरी के इंटरव्यू सीरीज की चौथी कड़ी में मंच के मैनेजिंग एडिटर आर्यन आदित्य ने बात किया- ऑक्सफोर्ड इंडिया प्रेस के एसोसिएट मार्केटिंग डायरेक्टर, जनता स्टोर के लेखक,…

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साक्षात्कार : प्रतीक पचौरी

http://sociolegalliterary.in सोशियो लीगल लिटरेरी के इंटरव्यू सीरीज की तीसरी कड़ी में, मंच के संस्थापक संपादक राजेश रंजन एवं मैनेजिंग एडिटर आर्यन आदित्य ने बात किया, उभरते हुए अभिनेता, निर्देशक, प्रतीक…

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साक्षात्कार : दलित विमर्श

सोशियो लीगल लिटरेरी के इंटरव्यू सीरीज के दूसरी कड़ी में आज हमारे साथ हैं दलित दस्तक के संपादक, अशोक दास जी। अशोक दास जी इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन जेएनयू…

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साक्षात्कार : एम. के. पांडेय

सोशियो लीगल लिटरेरी के इस इंटरव्यू सीरीज की पहली कड़ी में मंच के संस्थापक संपादक राजेश रंजन ने बात किया , भोजपुरी साहित्य के जानकार , लेखक, लल्लनटॉप कॉलमनिस्ट प्रोफेसर मुन्ना कुमार पाण्डेय से।

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