गीत चतुर्वेदी से गायत्री की बातचीत

अंवा-गार्द एक फ्रेंच शब्द है, जो आमतौर पर पुराने ज़माने में सेना की टुकड़ी का नेतृत्व करने वाले सिपाही या सेनापति के लिए इस्तेमाल किया जाता था। बाद में कला की दुनिया में उन लोगों को परिभाषित करने में प्रयुक्त होता था, जो नवीन प्रयोग करते थे, कलात्मक प्रयोगधर्मिता की अग्र पंक्ति में खड़े होते थे, रूढ़िवादी नहीं थे। जहाँ तक मेरी बात है, कई बार मालूम भी नहीं चलता या देर से पता चलता है कि आपके बारे में ऐसा कोई शब्द या विशेषण- जैसा कुछ प्रयोग किया जा रहा है। ऐसे शब्द या उपाधि या विशेषण पढ़ने-सुनने में कई बार अच्छे लगते हैं, बाज़ दफ़ा अच्छा भी महसूस होता है, लेकिन समग्रता में मैं इन सब से प्रभावित नहीं हो पाता। मैं अपने काम को अधिक देखता हूँ, नाम और उपाधियों को कम।

Read more →

धोबीघाट : ‘महानगर,भूख,हताशा की कहानी’

फ़िल्म के मूल में दरभंगा से भागकर बम्बई आया लड़का (प्रतीक बब्बर) है,जो इस बात के जवाब में कि वह बम्बई क्यों आ गया,कहता है कि ‘वहाँ हमेशा भूख लगी रहती थी।’ यह संवाद फ़िल्म का डायलॉग भर नहीं,बल्कि सच्चाई है।भारत विश्व में सर्वाधिक भूखों का देश है। 2019 में आयी ग्लोबल हंगर इंडेक्स रिपोर्ट में 217 देशों में भारत 202वें स्थान पर है।

Read more →