राजनैतिक शिष्टाचार और विचारधारा की अर्थी

समाज को अगर जानना समझना है तो सबसे ज़रूरी है उस समाज के साहित्य से थोड़ा परिचित होना। साहित्य समाज का दर्पण होता है। मगर उस दर्पण को आजीवन शीशमहल…

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अनुभव सिंहा की नयी फ़िल्म ‘थप्पड़’ पर कुछ बातें…

इस फ़िल्म की ख़ासियत है कि यह घरेलू स्तर पर स्त्री-पुरुष के बीच व्याप्त, ग़ैरबराबरी के अनेक महीन मुद्दों को बारीकी से दिखाती चलती है।

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