संविधान संवाद – तरुणाभ खेतान

नीति निर्देशक तत्व- परिचय एवम् विमर्श

संविधान संवाद : तरुणाभ खेतान के साथ एपिसोड -1 यह संवाद का मुख्य उद्देश्य, संविधानिक साक्षरता की रिक्तता (गैप) को गैर अंग्रेज़ी भाषाओं में लाकर संविधान की पहुंच को व्यापक बनाना है। इस सीरीज को विभिन्न भाषाओं में उपलब्ध कराकर कानूनी भाषा की तकनीकी चुनौती को दूर करना है। प्रोफेसर खेतान ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय वाधाम कॉलेज में प्रोफेसर एवम् संविधानिक स्कॉलर भी हैं। इस सीरीज की होस्ट सुरभि कारवां जो विधि शोधार्थी हैं एवम् कानून के मुद्दे पर मुखरता से लिखती पढ़ती रही हैं साथ ही राजेश रंजन हैं जो सोशियो लीगल लिटरेरी के संस्थापक हैं। सीरीज के पहले एपिसोड में नीति निर्देशक तत्व, उनकी महत्ता, संविधान बनने की प्रकिया में उन पर विमर्शों पर बातचीत की गई है। यह संविधान संवाद लाइव लॉ के माध्यम से आप तक पहुंच रहा है। जिसके लिए हम उनके विशेष आभारी हैं।

वैचारिक विरोधियों का भावबोधक अनुकूलन

संविधान संवाद – नीति निर्देशक तत्व एवम् वैचारिक मता विरोधियों का समायोजन एपिसोड-2 संविधान संवाद के इस एपिसोड में प्रोफेसर खेतान ने सुरभि कारवां एवम् राजेश रंजन से बातचीत में विस्तार से अपने पेपर नीति निर्देशक तत्व एवम् वैचारिक विरोधियों के भाव बोधक समायोजन (Directive principles and the Expressive accommodation of ideological dissenters) पर विस्तार से चर्चा किया। प्रोफेसर खेतान इस बातचीत में गांधीवादी, समाजवादी, हिन्दू राष्ट्रवादी जैसी विचारधारा का नीति निर्देशक तत्वों में समायोजन से लेकर संविधान में धर्मनिरपेक्षता उदारवादी मूल्य इन सब को संविधान के संदर्भ में विस्तार से समझाते हैं। यह सीरीज सोशियो लीगल लिटरेरी का लाइव लॉ के कोलेबोरेशन में आप तक पहुंच रहा है।
लिंक ऑफ द पेपर ( Link of the paper ) – https://papers.ssrn.com/sol3/papers.cfm?abstract_id=2888987